
भक्तो ने हिल मिलकर उत्सव मनाया है,
कमी आपकी श्याम आ जाइये,
बस कमी आपकी श्याम आ जाइये।।
तर्ज – ये रेशमी झुल्फे।
लटके फूलो की लडिया दरबार में,
महके अंतर की खुशबू दरबार में,
जगमग जगमग ज्योत जली,
लगती है कितनी हली भली,
कमी आपकी श्याम आ जाये,
बस कमी आपकी श्याम आ जाये।
पलके सबकी बिछी है तेरी राह में,
तरसे प्रेमी तुम्हारे तेरी चाह में,
धिनक धिनक ढोलक बोले,
अमृत रस मुरली घोले,
कोई मेवा मिश्री लाया है,
कोई कंदुल भेट में लाया है,
अपनी अपनी श्रद्धा से,
आये सब तुमसे मिलने,
रंग भाव भजन का निखरा यहाँ,
अटके श्याम बिहारी ढूंढे कहाँ,
वादा याद दिलाते है,
‘नंदू’ क्यों तरसाते है,
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