
भगता रो बेडो भव जल में,
किनरे भरोसे ओ,
थारे भरोसे ओ बापजी,
थारे भरोसे ओ,
दर्शन करवा अजमल आया,
नगर द्वारिका धाम,
पुजारी मार्ग बतलायो,
सागर में घनश्याम,
कूद पड्या समंदर में अजमल,
थारे भरोसे ओ पीरजी,
पिछम धरा मे राकस भारी,
भैरव जिनरो नाम,
मिनख मारने खावे वैरी,
आवे ढलती शाम,
बाली नाथ जी करता तपस्या,
डाली बाई भगत आपरी,
पायो थासु ग्यान,
आप समाधि लेता आटी,
डोरा निकल्या माय,
डाली बाई लीनी समाधि,
गाँव रूनीचा धाम आपरो,
साचो है दरबार,
आस हिया मे लेकर आवे,
दर्शन ने नर नार,
दूर दूर सु पैदल आवे,
मैणादे रा लाल आपने,
दास अशोक सुनाय,
भादरवा री बीज बापजी,
दीजो दर्श दिखाय,
डगमग डोले नाव भंवर मे,
गायक – कीर्ति जोशी मोईनुद्दीन जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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