
भला बुरा ना देखे ना वो
देखे गोरा काला
सबकी इच्छा पूरी करता
शिव शंकर मतवाला।।
एक चोर जब घर से निकला
दीखा शिवाला का प्रयोग करें
शिवजी के उपर लतका था
घंटा एक निराला।।
कहा चोर ने इतना ऊंचा घंटा कैसे पऊ
साधन कोई नहीं है यारो कैसे इसे चुराऊ
क्या मुझे भुखा रखने वाला सबको देने वाला।।
मंदिर के अंदर जकारके प्रेम से शीश झुकाया
बड़े भाव से कालेश्वर को अपना वचन सुनाया
क्या तेरे दरबार से भोले खाली मैं जाऊंगा
जैसे भी संभव हो घंटा ले जाउंगा
आखिरी उसने बड़े जतन से रास्ता एक निकला।।
छमा मांग कर
शिव मस्तक पर चाड बैठा अग्यानी
शिव भोले ने सोचा
मेरा परम भक्त ये प्रेणी।।
फूल और गंगा जल तो
हर भक्त चढ़ा जाता है
लेकिन खुद को अर्पित करने कोई कोई अता है।।
शिव शंकर प्रगते धरण कर
जटा जूत मृग छला
देख को भोले बाबा को
वो चोर बहुत घबराया
क्या बोले क्या ना बोले
बेचारा समाज ना पाया
भोले बोले मुझे देख कर क्यों तू घबराता है
मुझसे मेरा भक्त मन चाहता फल पाता है
आज तुझे अर्पित करता हूं
शिव के शांग शिवाला।।
कहा चोर ने शिव भोले से
ना पाप करु जीवन में
बुरी भावना कभी किसी के लिए ना आए मन में
वैसा ही होगा जैसा तू चलेगा प्राण
एक चोर को संत बना कर
गए वो औघड़ दानी
छोटी सी एक उसकी भूल ने
काम नया कर डाला
भला बुरा ना देखे
ना वो देखे गोरा काला
भोले तेरे नाम से गुजरा हमारा
आओ मिले गाये शिव शिव गाये
भोले का रूप निराला से बहती जटा में गंगा
जय हो बाबा अमरनाथ जय अमरनाथ बर्फानी
एक ताल पे डमरू बाजे बम चिक चिक बम
भोला भांग खौगे या दम लगाओगे
दुनिया में एक बात बड़ी मशहूर है
प्यारी प्यारी तेरी गोरजा कुए बीच गिराई
एक लोटा जल चढ़ाओ ध्यान बस दो पल लगाओ
सारे जग को पालते हैं मेरे नील कंठ भगवान
मन छोड़ व्यार्थ की चिंता तू शिव का नाम लिए जा
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