
भाई रे तीन लोक के नाथ बैठ लिए अर्जुन के रथ पर
Bhaai Re Tiin Lok Ke Naath Baith Lie Arjun Ke Rath Par lyrics
भाई रे तीन लोक के नाथ बैठ लिए अर्जुन के रथ पर
अर्जुन के रथ पर बैठ लिए अर्जुन के रथ पर ,
छप्पन भोग धरे हैं आगे
दुर्योधन तू क्यों घबरावे
भाई रे ना खाने को टाइम
बैठ लिए अर्जुन के रथ पर ,
कौरव पांडव हुई लड़ाई
दुर्योधन की मती बोराई
भाई रे लीला दिखाई घनश्याम
रथ पर बैठे कृष्ण कन्हाई
अर्जुन को कुछ समझ ना आई
भाई रे गीता सुनाई घनश्याम
चाचा ताऊ कुटुंब कबीला
मतलब कि यह सारी लीला
अर्जुन उठाओ तीर कमान
लीलाधारी लीला दिखामे
भीष्म को कुछ समझ ना आवे
भाई रे मैं हूं सेवादार
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