
भेरुजी प्रकटिया प्रगटिया नदी गोमती माय
भेरुजी प्रकटिया प्रगटिया,
नदी गोमती माय,
परचो दिखायो,
जुग में आईने हो जिओ।।
भेरू जी होया होया तेजो बा री लार,
थाने चुनाया घर रे मायने हो जिओ,
भेरुजी प्रगटिया प्रगटिया,
भदेसर चौथी पीढ़ी पे आया आप,
रूपा ने सताया गणा आय ने हो जिओ,
भेरू जी नाका सु खून गिराया आप,
चुहला में दबाया रूपा लाल ने हो जिओ,
अनदाता भोपा बनाया तेजा आप,
चलते भुत होया थारी लार ने हो जिओ,
भेरू जी भुत बोले भोपा ने आय,
मारी पूजा भेरू रे साथ में हो जिओ,
भोपा जी चले चले गांव पाणून्द माय,
भेरू आमलिया संग में होवया हो जिओ,
आमलिया गाय रे खुटे सु चाल्या लार,
ऊँचा मंगरी पे बैठा साथ में हो जिओ,
भेरू जी भजन केउ सुनो ध्यान लगाय,
धरम तंवर थाने गाविया हो जिओ,
गायक / लेखक – धर्मेंद्र तंवर।
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