
मन धीर धरो घबराओ नहीं,
श्री राम मिलेंगे कहीं ना कहीं,
भगवान मिलेंगे कहीं ना कहीं,
तर्ज – दिल लूटने वाले।
सूरज में मिले चंदा में मिले,
तारों में मिलेंगे कहीं ना कहीं,
ऐ भक्तो तुम बढ़ते जाओ,
श्री राम राम कहते जाओ,
मंदिर में मिले गिरिजा में मिले,
गुरूद्वारे में मिलेंगे कही ना कही,
बस राम नाम रटते जाओ,
श्री मिलेंगे कहीं ना कहीं,
गंगा में मिले यमुना में मिले,
त्रिवेणी में मिलेंगे कहीं ना कही,
बस प्रेम से सब रटते जाओ,
मथुरा में मिले काशी में मिले,
अयोध्या में मिलेंगे कहीं ना कहीं,
सियाराम राम रटते जाओ,
रामायण में मिले गीता में मिले,
बाइबिल में मिलेंगे कहीं ना कहीं,
गायक – श्री रामवतार जी शर्मा।
प्रेषक – वीरेंद्र सिंह कुशवाह
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