
मन लागे ना तेरे बिना आजा आजा मेरे साजना
मन लागे ना तेरे बिना,
दोहा – जिनके हिय बसत है,
राधा वल्लभ लाल,
तिनकी पदरज लेई,
पीवत रहो सब काल।
आजा आजा मेरे साजना,
मेरे घनश्याम मन मोहना,
तेरी बंसी पे हां मैं दीवानी हुई,
श्याम तू मैं तेरी राधा रानी हुई,
प्रेम मेरा तुम्हारा घना,
तेरे बिन तन तो है प्राण तन में नहीं,
अब नयन नीर भी इस नयन में नहीं,
काटे कटते ना रैना दीना,
चैन तुमही तुम्ही मेरे आराम हो,
कुछ बताओ कहां मेरे घनश्याम हो,
हाथो से छूटी जाये हिना,
गायक – श्री अशोकानंद जी महाराज।
प्रेषक – डॉ सजन सोलंकी।
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