
मनक जनम की मौज,
फेर नहीं आवे,
ओर नहीं आवे,
म्हारा सतगुरु दीनदयाल,
ओर की सावे।।
आसन पदम लगाय,
एक धुन लाया,
म्हारी सुरता सुहागन नार,
ज्ञान घर पावे।।
ऊन मुन की सेरीया पर,
सुरत म्हारी जावे,
या करोड़ भान परकाश,
सुन घर पावें।।
त्रिवेणी की तीर,
संत कोई नावें,
जारा कटे करम का,
किट पाप झड़ जावे।।
गावे गणेश खरवाल,
अमर पद पावे,
कहता घीसा लाल,
मोक्ष पावे।।
प्रेषक / गायक – जगदीश चन्द्र जटिया।
9950647154 मावली उदयपुर राजस्थान।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

