
मनमोहन खेल रहे होली मनमोहन,
हारे मनमोहन हमबे मनमोहन,
खेल रहे होली मनमोहन,
कोई बचा न कुन्ज गली में,
हां वारे रसिया हो वारे रसिया,
ऐसी मोहन की टोली हा ओ मनमोहन,
कोई बना है रंग रंगीला,
उड़े गुलाल माले रोली हा ओ मनमोहन,
चुनार भीग गयी सखियाँ की,
हो अबीर गुलाल फीट में कसके,
मारत भर भर के झोली हा ओ मनमोहन,
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