
कलकल कलकल कलकल बहती,
अमरकण्ठ से आई है,
महाकाल की बेटी देखो,
मेरी नर्मदा माई है,
देखे – माँ पतितपावनी हे माँ जगतारिणी।
शिव की परम देवी हो कन्या,
अमरकण्ठ निवासिनी धन्या,
बिन पतवार भवर में नैया,
अब तो दर्शन दे दो मैया,
घाट घाट पर ऋषि मुनियों ने,
जिसकी महिमा गाई है,
कालचक्र ने दिया है घेरा,
एक सहारा मुझको तेरा,
तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे,
दया करो माँ हम है वारे,
तेरे चरणों की भक्ति में बस,
निर्मलता ही पाई है,
जा पर कृपा तुम्हारी होई,
ता पर कृपा करे सब कोई,
पवित्र होने तट पर तेरे,
ये दुनिया सब आई है,
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