
महाकाल की दिव्ये धारा पर पावन सावन छाया,
कावड़ियों का रंग गेरहुआ केसर सा बिखराया,
रिमझिम बुहार बम बम बुहार से जब झूम उठा सारा,
बम महादेव शिव महादेव का जय कारा जय कारा,
हर हर नमः शिवायै बोलो हर हर नमः शिवाये
कावड़ में पावर भरते खुद ही बम भोले,
गगरी में गंगा जल भी बम बम भोले ,
पैरो में छाले हो या कष्ट कोई तन में
कावड़िया भड़ते जाते शिव की धुन में,
भोले बाबा पार करेंगे नारा यही लगाते,
पथरीले राहो पे हस्ते गाते चलते जाते,
भोले थकान बस लेके नाम लिया शिव का इक सहारा,
देवो के देव करेंगे सब का बेडा पार,
किरपा से खुल जायेगे बंद किस्मत के द्वार ,
ोहगढ के दानी है ये आशुतोष भगवन इनके चरणो में पा लो सुख सारा कल्याण,
झर झर सावन जैसी किरपा बरसाओ हे नाथ,
भक्तो दो चरणों में तेरे ये टिका रहे ये मान
तेरे सिवा अब कौन है शिवा अपना तारण हारा,
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