
अम्बे अम्बे जय माँ अम्बे,
महिमा निराली तेरी माँ जगदम्बे,
हे जगमाता वरदानी,
तेरा ना कोई सानी,
पल में बनाती है तू जिन्दगी,
महिमा तेरे दर की मशहूर है,
भक्तों को मिलता यहां नूर है,
तेरे दर पे अकबर आया,
मेरी माँऽऽऽऽऽ
सोने का छत्र चढ़ाया,
चरणों मे शीश झुकाकर,
माँ तेरी महिमा गाया,
करने लगा वो तेरी बन्दगी,
ऊँचे पहाड़ों पे तेरा द्वार है,
सागर से गहरा माँ तेरा प्यार है,
हे मैया शेरावाली,
भर देती सबकी झोली,
जो दर पे आए सवाली,
जाए ना कभी वो खाली,
जिसकी भी जैसी हो मन की लगी,
गीतकार – शिवकान्त झा।
गायक – चंदन अनुराग।
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