
अम्बे ओ जगदम्बे माता, "तूँ है जग की जननी माता
दुःखियों पे तूँ मेहर है करती, ख़ाली झोली को है भर्ती,
मुर्दों में भी जान तूँ पाए, "अंधों को दे अख्खियाँ जाए
पाप जभी, जग ते बढ़ जाए चण्डी बन तूँ दुष्ट मिटाए,
सजा के मंदिर आदि कुँवारी, करके शेरों की असवारी,
किया जग पे तूँ उपकार, माँ तेरी पूजा करे,,,
"पूजा करे संसार, माँ तेरी पूजा करे
ऊँचे ऊँचे पर्बत तेरे, ऊँची तेरी शान है,
शाम सवेरे सज्जदे करता, सारा तुझे जहान है
सज्जदे करे जहान है
जंगलों में तूँ मंगल लगाए, जगह जगह पे मंदिर बनाए,
श्रद्धा से जो दर पे आए, "मईया जी के दर्शन पाए
घर घर में तूँ बाँटे खुशियाँ कर करके जगराते दुखिया,
तुझको अपने दुःख सुनाए, "तूने सबके दुःख मिटाए
एक ही तूँ है, जो देती है...
हर दुखिया को प्यार, माँ तेरी पूजा करे
रोशन रहे जहान का राह, ज्योतों को तूने जगाया है,
तेरी ज्योति ने अकबर, "राजा का शीश झुकाया है
सर्व कला सम्पूर्ण माई, हर कतरे में तूँ समाई,
धन्य है मईया तेरी कमाई, "हर प्राणी की सुने दुहाई
चँदा सूरज और सब तारे तेरा पानी भरते सारे,
तेरी रूह के अंदर हँसता, "ब्रह्मा विष्णु महेश बस्ता
शाम सवेरे, हर कोई करता..
तेरी ही जय जयकार, माँ तेरी पूजा करे..
तेरे दर पे अम्बे मईया, ऐसे हाल में आती न,
गर यह मेरा हाल न होता, "तुझको दुःख सुनाती न
तेरी लीला अपरम्पार, तूँ करती है सबसे प्यार,
जो आ जाए तेरे द्वार, "कर देती हो बेडा पार
मेरे भी तूँ दुःख मिटा दे डूबती नईया पार लगा दे,
मोड़ के मुझको नर को देह माँ, "स्वर्गों की तूँ राह दिखा दे
भूले भटके, राहियों की तूँ
देती दिशा सवार, माँ तेरी पूजा करे,,,
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