
माँ नसीब से ज्यादा दे रही है
बिन पानी के नाव खे रही है,माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥
भूखें उठते है भूखे तो सोते नहीं,दुःख आता है हमपे तो रोते नहीं,दिन रात खबर ले रही है,माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥
उसके लाखों दीवाने बड़े से बड़े,उसके चरणों में कंकर के जैसे पड़े,फिर भी आवाज मेरी सुन रही है,माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥
मेरा छोटा सा घर महलों की रानी माँ,मेरी औकात क्या महारानी है माँ,साथ ‘बनवारी’ माँ रह रही है,माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥
ज्यादा कहता मगर कह नहीं पा रहा,आंसू बहता मगर बह नहीं पा रहा,दिल से आवाज ये आ रही है,माँ नसीब से ज्यादा दे रही है ॥
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