
माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ,
प्रथम हाथ में ढाल लिए दूजे तलवार,
तीजे लिए सिरोही चौथे में कटार ॥
पँचवे गदा सम्हारे रे छठवें त्रयशूल,
सातव पकड़े दुश्मन आठव दिए हूल ।
चढ़ी सिंह देवी गरजे रे बांधे हथियार,
कौन बीर है रण में जो ठाने रार ।
पापी बधे अनेकों रे दुर्गा दसभाल ।
अभिमानी नहीं छोड़े कर दिए हलाल ।
कृष्ण उतारे माँ की आरति रे भरि कंचन थार ।
सुरपति चँवर डुलावें कालों की काल ।
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