
मारगीयो झीणो झीणो रे,
जोगाराम रो।
दोहा – सायब तेरी सायबी,
मोहे लागे हैं कित दूर,
जो पाया उन्हें मिला,
ज्यारे मुख पे बरसे नूर।
ए मारगीयों झीणो झीणो रे,
जोगाराम रो अरे जोगाराम रो,
ए पंछीराम रो ए जोगाराम रो,
अरे खोंडा वाली धार,
सुई वालो धागो रे,
अरे भई खोंडा वाली धार,
अरे असल सुई वालो धागो रे,
अरे कटडी सुरत,
नरतपर लागी रे,
ए भई कटडी सुरत,
अरे अमे ढोलकी रो डाको,
अरे ढोलकी रो डाको,
ए ऊंडा ऊंडा नीर,
अथंग जल भरीया रे,
ए भई ऊंडा ऊंडा नीर,
अरे नीर पीवे कोई बिल्लो,
अरे कहस कबीर सुनो भई साधु रे,
अरे संत दियो जट हाथो रे,
अरे तनरा तार,
मारे मनडा री माला,
ए माला मणीयो,
मारे मन में फिरे,
अरे माला रो मणीयो,
अरे घट माई मन्दिर मारे,
घट माई देवता,
अरे मन्दिर वालो दिवलो,
मारे घट में जले,
अरे तन रा तार मारे,
मनडा री माला,
अरे तन रा तार,
ए माला रो मणीयो,
ओ माला रो मणीयो,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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