
मिल कहो गर्व से हिन्दू है हम,
यह हिन्दूस्तान हमारा,
था स्वामी जी का नारा,
है उस सपुत की सार्द सती जो,
भारत माँ का प्यारा,
था संस्कृति का रखवाला,
था भारत माँ का प्यारा,
वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्।।
तर्ज – जहाँ डाल डाल पर।
गुरू रामकृष्ण के चरणों में,
बालक नरेन था आया,
गुरू रामकृष्ण के चरनो मे,
तब उसके मुख का तेज देखकर,
गुरू ने था अपनाया,
वह रूप विवेकानंद हुआ ,
माँ काली का था प्यारा,
नारा अमर दिया था,
कर्म योग और राज योग हित,
हमको प्रबुद्ध किया था,
वह कन्याकुमारी अमर शिला,
सागर का धन्य किनारा,
वह आज शिकागो याद करे,
जहाँ धर्म पताका फहरी,
युग पुरूष विवेकानंद तुम ही थे,
धर्म ध्वजा के पहरी,
था विश्व धर्म सम्मेलन में,
भारत का रूप सवारा,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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