
मिल गया जबसे तेरा ये दर सांवरे
मिल गया जबसे,
तेरा ये दर सांवरे।
तर्ज – छोड़ दे सारी दुनिया किसी।
दोहा – श्याम कृपा से,
जग में बन्दे,
सब कुछ ही तू पाएगा,
जब भी पुकारो,
श्याम प्रभु को,
वो लीले चढ़कर आएगा।
फिर हुआ ना कभी,
दर ब दर सांवरे,
रख दिया तेरी चौखट पे,
जब से ये सर,
मिट गई सारी,
चिंता फिकर सांवरे,
मिल गया जब से,
सारी दुनिया की खुशियां,
तुम्ही से मिली,
खिल गई मन की,
मुरझाई हर एक कली,
भोर जीवन की,
इतनी सुहानी लगे,
देख ली जब से,
खाटू की हर एक गली,
अब ना भाते नज़ारे,
जगत के मुझे,
मिल गई जबसे,
तुमसे नज़र सांवरे,
क्या लिखूंगा मैं बाबा,
तुम्हारे लिए,
आपकी ही लिखी,
एक लिखावट हूँ मैं,
मेरा मुझमे नहीं,
और कुछ भी प्रभु,
तू है सबकुछ तुम्हारी,
सजावट हूँ मैं,
जिंदगी के ये गम,
हो गए सब ख़तम,
हो रहा है सुकु में,
बसर सांवरे,
गर्व से सारी दुनिया में,
कहता हूँ मैं,
मेरी पहचान ‘साहिल’,
मेरा श्याम है,
प्रीत की डोर ‘पन्ना’,
जुडी श्याम से,
अब ना रुकता कोई भी,
मेरा काम है,
मेरे विश्वास को,
इतना पक्का किया,
फिरता हूँ मैं जगत में,
निडर सांवरे,
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