
मुझे याद है वो दिन खाटू श्याम
मुझे याद है वो दिन,
दोहा – हम प्रेमी हैं श्याम के,
गर्व से कहते हम,
श्याम का प्रेमी बनूँ हमेशा,
लूँ मैं जब भी जनम।
मुझे याद है याद है,
याद है वो दिन,
मुझे याद है,
ना मंज़िल था ना ही ठिकाना,
ना था कोई सहारा,
सांवरिया ने बदल दी किस्मत,
करके एक इशारा,
तर्ज – दे दे प्यार दे।
देखि मैंने दुनिया दारी,
देखे रिश्ते नाते,
सुख के साथी हैं सब सारे,
दुःख में नज़र ना आते,
देखा मैंने सबसे अलग है,
मेरा खाटू वाला,
जब हँसते थे अपने मुझपे,
इसने मुझे संभाला,
हम निर्धन का सेठ सांवरा,
है विश्वास हमारा,
मौज से गुज़रे अब दिन मेरे,
जबसे दिया सहारा,
मुझ हारे को जीत का तोहफा,
देके हंसना सिखाया,
अपनी कृपा के फूल से मेरा,
ये जीवन महकाया,
जबसे मैंने खाटू धाम की,
माटी माथे लगायी,
इस पावन माटी ने मेरी,
मुश्किल दूर भगाई,
यहाँ के कण कण वास प्रभु का,
‘कुंदन’ इतना जाने,
हर प्रेमी के मन की भाषा,
सांवरिया पहचाने,
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