
मुझे राधे नाम सुनाई दे,
चितचोर बड़ा तू छलिया,
वृन्दावन कि ये गलियां,
तेरी बांकी बांकी सोणी सोणी,
चितवन श्याम दिखाई दे,
मुझे राधे राधे, मुझे राधे राधे,
मुझे राधे राधे राधे राधे नाम सुनाई दे।।
टेढ़ी वो मटक बाकी सी लटक,
मुस्कान है अधरों की,
पथ भूले पथिक कहते हैं रसिक,
क्या बात है नजरों की,
दीदार करे जो घायल,
हो जाता तेरा वो कायल,
तेरी मधुर बड़ी मुस्कान,
चैन मेरे मन का ले लेगी,
उस पर मुरली की तान,
मुझे ये मार ही डालेगी,
छम छम करती ये पायल,
झूमे ‘लहरी’ दिल पागल,
स्वर – उमा लहरी जी।
प्रेषक – भारत कुमार जी।
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