
मूल मडोण सेज धून लागी,
प्रेम जोत प्रकाशा,
गुरु जी रा वचन,
हिरदा रे माही राखो,
खोजत खोजत पाया,
डूंगर पूरी केवे सूणो हंस राजा,
धिन गुरूजी दर्शाया जी।।
शूशियो भोण होया दोनू भेला,
घर सूखमण रे आया,
आपरो कलश अमीरस भरीया,
पिवत पिवत पाया,
त्रिगटी रो ध्यान धिरप सू धरीयो,
सूरत नूरत मिलाया,
रूम रूम धून गेरी गाजे,
अनहद नाद घूराया,
लिवनारी डोर सिल नट सडियो,
चढत निशान घूराया,
रमत मडी राम थारे आगे,
सूर नूर जोवण आया,
सोवन सिखर मे महा धर्म रसियो,
दर्शन विरले पाया,
डुगर पूरी गूरू जी रे सरणे,
बोहे अमरा पूर पाया,
गायक – प्रेम गोस्वामी बाड़मेर।
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