
नहीं परवाह ज़माने की,
मेरा गोविन्द रखवाला,
मेरा गोविंद रखवाला,
मैं नाचूं प्रेम में उसके,
नचाए बांसुरी वाला,
तर्ज – मेरे सरकार आये है।
चढ़ा मुझपे नशा ऐसा,
की अब बेहोशी छाई है,
कहा किसने सुना किसने,
ये जाने बांसुरी वाला,
कदम अब रुक नहीं पाते,
की मैं गिरता ही जाता हूँ,
नहीं सुध अब सम्भलने की,
संभाले बांसुरी वाला,
है दिल में जख्म जितने भी,
वो अब दुखते ना जलते है,
मेरे घावों पे अब मरहम,
लगाए बांसुरी वाला,
‘सुनील’ अब ये तमन्ना है,
की मैं उसमे ही खो जाऊं,
मैं लेटूँ गोद में उसकी,
सुलाए बांसुरी वाला,
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