
मेरा मन हर लिया शेरांवाली ने
मैनूं, दर, ते बुलाया, मेहरां वाली ने ।
शेरां, वाली ने बुलाया, मेहरां वाली ने ।
मैनूं, चरणां, नाल लाया, शेरांवाली ने ।
लोटा, सोने दा, लियावां ॥
विच, गंगा, जल पावां ॥
मैं ते, चरण धुवावां, शेरांवाली दे ।
नी मैं, जंगलां च, जावां ॥
ओथों, चंदन, लियावां ॥
मैं ते, तिलक लगाया, शेरांवाली दे ।
नी मैं, बागां, दे विच जावां ॥
ओथों, कलियां, तोड़ लियावां ॥
मैं ते, हार पहनाया, शेरांवाली दे ।
नी मैं, कटड़े, शहर नूं जावां ॥
ओथों, चुन्नियां, लियावां ॥
ओ चोला, तन ते सजाया, शेरांवाली दे ।
मां दे, हथीं, महिंदी लावां ॥
पैरीं, झांझरां, मैं पावां ॥
ओ चूड़ा, बांहां च पहनाया, शेरांवाली दे ।
नी मैं, कीरतन करवावां ॥
मां दा, सोहणा, आसण लावां ॥
ओ सानूं, दरश दिखाया, शेरांवाली ने ।
नी मैं, संगतां, बुलावां ॥
रलमिल, भेटां, मां दियां गावां ॥
ओ सब नूं, पार लगाया, शेरांवाली ने ।
अपलोडर – अनिलरामूर्ति भोपाल
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