
मेरा श्याम ने पकड़ा हाथ की रहता हर पल मेरे साथ
मेरा श्याम ने पकड़ा हाथ,
की रहता हर पल मेरे साथ,
अकेला मत समझो,
तर्ज – मेरे बांके बिहारी लाल तू।
जबसे इसने अपनाया है,
जीने का ढंग सिखलाया है,
मन में रहता उत्साह,
नहीं अब सुख दुःख की परवाह,
मैं जग में निर्भय घूम रहा,
इसकी मस्ती में झूम रहा,
इसने बदली तकदीर,
मिटाके हर मुश्किल गंभीर,
मिलते है इसके दीवाने,
कुछ जाने और कुछ अंजाने,
उनसे मिलता जो प्यार,
क्या देगा कोई रिश्तेदार,
ये प्यार बहुत ही करता है,
और भाव हृदय में भरता है,
‘बिन्नू’ का ये मनमीत,
झुमके गाऊं इसके गीत,
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