
मेरा हाथ पकड़ ले रे
मेरा हाथ पकड़ ले रे कान्हा मन मेरा गबराये,
काले काले बादल ग़म के बादल सिर पे मेरे मंडराए,
अगर मेरे वस में होता कन्हियाँ,
किनारे लगा ता खुद अपनी नाइयाँ,
यहाँ यहाँ रखु जैसे जैसे रखु पाँव फिसलता जाए,
अगर आना है तो आ जा कन्हिया,
पार लगा जा बनके खवैया,
धीरे धीरे करके थोरा थोरा करके वक़्त गुजरता जाए,
नही आना हो तो खबर भेज देना,
हालत उठा के नजर देख लेना,
कही ऐसा ना हो तेरे भरोसे बनवारी रे गए,
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