
अपनों को बुलाती माँ,
सपनों को सजाती माँ,
दुःखियों को हसाती माँ,
मेरी माँ संतोषी,
तेरी जय जय कार संतोषी माँ,
करू बारम्बार संतोषी माँ.....
संतोष करना सभी को सिखाये
संतोषी ही तो परम सुख पाए
सब पे रखे अपने दृष्टि दया की
दीन दुखी को गले से लगाये
ममता सब पे लुटाती माँ
जब भी माँ के द्वारे पे आये,
ख़ाली हाथ ओ कभी न जाए,
आस किसी की टूटे कभी न,
जीवन में सारी सफलता ओ पाये,
राह सब को दिखाती माँ,
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