
मेरे गुरुदेव जैसी जगत में,
दूसरी कोई हस्ती नहीं है,
जो बरसती है रहमत यहाँ पर,
वो कही भी बरसती नहीं है।
तर्ज – ये तो प्रेम की बात है।
सब जगह हमको माया सताती,
युक्ति बचने की समझ में ना आती,
इनकी बस्ती में आकर जो बसते,
वासना उनमें बसती नहीं है,
ज्ञान सागर में हम खाते गोता,
आत्म चिंतन यहाँ नित्य होता,
सद्गुरु चिंतन में जो लोग रहते,
चिंता नागिन भी डँसती नहीं है,
जिसने आत्म स्वरुप है पाया,
जिसने ‘राजेश्वर’ गुरु गुण है गाया,
व्यर्थ विषयों के लिए वासना बस,
बुद्धि उसकी तरसती नहीं है,
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