
मेरे दिल के शीशे में जड़ गई तस्वीर कन्हैया की
मेरे मन को भाई है,
तदबीर कन्हैया की,
मेरे दिल के शीशे में जड़ गई,
तस्वीर कन्हैया की।।
मैंने बसाया तुझको,
अपनी निगाहों में,
आजा प्यारे आके भरले,
एक बार बाहों में,
वो मेरा दिलबर है,
मैं जागीर कन्हैया की,
मेरे दिल के शीशे में जड़ गयी,
मैं हूँ दीवानी तेरी,
तू ही बस प्राण मेरा,
कोरा है काजग दिल ये,
लिख लिया नाम तेरा,
खिंच ली है दिल पे,
ये लकीर कन्हैया की,
रूप के भंवर में प्यारे,
ऐसा उलझाया तूने,
कौन हूँ कहाँ से आई,
सब कुछ भुलाया तूने,
भस्मी रमा के,
हूँ फ़क़ीर कन्हैया की,
काली कमली वाले मेरे,
दिल की पुकार सुनले,
चरणों की दासी हूँ मैं,
एक बार बांह पकड़ ले,
सांसो की माला में,
आखिर कन्हैया की,
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