
मेरे सतगुरु दीनदयाल,
काग से हंस बनाते।।
भरा जहां भक्ति का भंडार,
लग्या जहाँ सतगुरु का दरबार,
शब्द अनमोल सुनाते है,
मन का भरम मिटाते है,
गुरु जी सत का देते ज्ञान,
जीव का हो ईश्वर में ध्यान,
वो अमृत खूब पिलाते है,
मन प्यास बुझाते है,
गुरुजी लेते नहीं कुछ दान,
खुद ही रखते भक्तो का ध्यान,
वो अपना माल लुटाते है,
सभी का कष्ट मिटाते है,
करो सब गुरु चरणों में ध्यान,
ये तुमसे करते भक्त बयान,
सारा दुख गुरुजी मिटाते है,
की भव से पार लगाते है,
गायिका – मीनाक्षी मुकेश।
प्रेषक – प्रमोद कुमार।
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