
मेरे हालात पे तेरी खामोशियाँ,
साँवरे अब सही हमसे जाती नहीं,
मुझको इतना बता दो मेरे साँवरे,
क्यों दया तुमको प्रेमी पे आती नही,
बनके टूटी सी तस्वीर कब तक रहुं,
ताने दुनिया के मैं श्याम कब तक सहुं,
आंसू की तेज धारा में कब तक बहुं,
मेरी दर्दो सितम से भरी दास्तां,
जानलो अब कहि हमसे जाती नहीं,
छलनी छलनी हुआ है ये सीना मेरा,
चैन अपनो ने ही श्याम छीना मेरा,
बिन तेरे अब तो मुश्किल है जीना मेरा,
थाम लो अब तो दामन मेरा मोहना,
तुझसे बढ़कर मेरा कोई साथी नही,
गहरी नदिया भंवर श्याम विकराल है,
मुँह को खोले खड़ा सामने काल है,
बेबसी में तेरा दास बेहाल है,
कैसे नैया किनारे पे लाऊंगा मैं,
राह कोई नज़र अब तो आती नहीं,
इस से पहले कि आशा निराशा बने,
सारी दुनिया में मेरा तमाशा बने,
हार की इक नई परिभाषा बने,
अपने चरणों की छाया में ले लो ‘तरुण’,
कोई चौखट मुझे और भाती नहीं,
स्वर – रजनी जी राजस्थानी।
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