
मैं आया जी श्याम थारे दर पे सवाली
मैं आया जी श्याम थारे दर पे सवाली
दर पे सवाली बाबा दर पे सवाली जी
लौटा जो न म्हाने खाली
सबर को बाँध यो छुटो जावे
डर लागे म्हारी लाज न जावे
हासेगा लोगडा दे ताली
मैं नर निर्बल थे नारायण करुना निधि ये शोक न सावन
करदो न म्हारी श्याम रुखाली
कलयुग यो मतलब को डेरो गोलू सुनो कस श्याम ही तेरो
हिवडे में थारी ज्योत जगा ली
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