
मैं, क्या क्या, सिफ़तां दस्सां,
शिव, शंकर दे, दरबार दियां ॥
एहदे, दर दियां, ठंडियां छांवां,
तप्पदे, हिरदे नूं, ठारदियां ॥
जद, गौरां नूं, व्याहवण आए ॥
भूत, प्रेत, बराती आए ॥
सखियां, शिव नूं, ताड़दियां...
विच, जटावां, गंगा वग्गदी ॥
बैल, सवारी, चंगी लग्गदी ॥
सिफ़तां, तारणहार दियां...
जय, शिव शंकर, जय शिव भोले ॥
बंद, किस्मत दे, जिंदरे खोले ॥
सिफ़तां, बख्शणहार दियां...
साफ़, जिन्हां दियां, हुंदियां नीतां ॥
भोले, नाथ नाल, लाउण प्रीतां ॥
लै, खुशियां, संसार दियां...
दर, भोले दे, झुल्लदे झंडे ॥
सभ नूं, मिठियां, मुरादां वंडे ॥
संगतां, अरज़, गुज़ारदियां...
छड्ड दे, भगता, दुनियांदारी ॥
शिव, शंकर नाल, ला लै यारी ॥
त्रिलोकी, सरकार दियां...
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