
मैं चरण शरण में आया हूँ,
भवसागर पार करो,
गुण नहीं म्हारे में कोई प्रभु,
अवगुण म्हारा ना ध्यान धरो,
बन बन भटक्यो बनवारी,
पर दिखी नहीं छवि थारी,
म्हे चारों धाम कर आयो,
पर मुरली सुनी ना थारी,
रही प्रेम री गागर खाली,
दर्शन देकर के इनने भरो,
मन दर्पण धूल उड़ाई,
मनमोहन सूरत दिख आयी,
एड़ी ज्ञान री ज्योत जगाई,
जग लागे कृष्ण कन्हाई,
भगता रे हिय भगवान सदा,
यो पुरो कोल करो,
एल्बम
“म्हारा सांवरिया गिरधारी”
गायक
“श्री सम्पत दाधीच”
संगीत
“श्री सतीश देहरा”
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