
मैं तो रमता जोगी राम,
मेरा क्या दुनिया से काम,
हाड़ माँस की बनी पुतलिया,
ऊपर जड़िया चाम,
देख देख सब लोग रिझावे,
मेरो तन उपराम,
माल खजाने बाग बगीचे,
सुंदर महल मुकाम,
एक पलक में सब ही छूटे,
संग चले नहीं दाम,
मात पिता और मीत प्यारे,
भाई बंधू सुत बान,
स्वार्थ का सब खेल बना है,
नहीं इनमे आराम,
दिन दिन पल पल छिन छिन काया,
छीजत जाए तमाम,
‘ब्रह्मानंद’ भजन कर प्रभु का,
मैं पाऊं विश्राम,
गायक – स्व. श्री कालूराम जी बिखरनिया।
प्रेषक – धनाराम खोजा खङकाली नागौर।
रचना – श्री ब्रम्हानंद जी।
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