
सुनो दुनिया वालो इक प्रीत मेरा धर्म,
सब की शांति भलाई का मैं अभिलाषी हु,
मैं राम के देश का वासी हु मैं कृष्ण के देश का वासी हु
मेरी मिटी माँ पुरषो की वीरो की,
जोश भर्ती है घंटियां मंदिरो की ,
जहां कोई वि गजन वि सिकंदर आये,
कई खिलजी ओ कासिम कलंदर आये,
शान टूटी सब के समसीरो की,
दाल गलने न पाई तुरकी तीरो की,
ना मिटाये मिटे मैं शिव अविनाशी हु,
मैं राम के देश का वासी हु
जहा राजा बलि जैसे दानी हुये,
करण जैसे महँ बलदानी हुये,
सत्ये वादी हरिशचन्दर की कथा,
सब को मालुम ददिची ऋषि की कथा,
सुर तुलसी की मीरा के सूंदर भजन,
बुध नानक कबीरा के जीवन दर्शन,
मैं अयोध्या हरिद्वार मथुरा का सिहु,
मेरे ही देश में गंगा यमुना वहे
वृन्दावन में कान्हा राधा राधा कहे,
है वासुदेव कुटंब का नारा यहाँ,
सुन से जिस के प्रगति पे सारा जहां,
धर्म के सत्ये के संग स्वर्ग नन्द रहे,
मिटी माथे चन्दन राकेश ले,
ज्ञान विज्ञान ज्योति की स्वर्ग में रासि हु,
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