
चरण रज लेने का कान्हा की,
मैं वृन्दावन को आई हूँ,
मैं वृंदावन को आई हूं,
अरे रसिया ओ मन बसिया,
तर्ज – लगन तुमसे लगा बैठे।
मैं राधे राधे गाउंगी,
श्री यमुना जी नहाउंगी,
अरे मोहन ओ मन मोहन,
छोड़ आए जमाने को,
ओ कान्हा तुमको पाने को,
अरे श्यामा ओ घनश्यामा,
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