
मैं हक़ से कहती हूँ श्याम हमारा है
मैं हक़ से कहती हूँ श्याम हमारा है,
मुझे पग पग पे वो देता सहारा है,
जब जब मैंने इसका नाम लिया,
उसने आके पल में थाम लिया है,
कहने को तो यूँ सारे ही अपने है,
तेरी वजह से पूरे हुए हर सपने है,
जो कुछ है पास मेरे,
वो सब तो तुम्हारा है,
हारे हुए को हर कोई बहलाता है,
केवल तू ही उनका साथ निभाता है,
जो थाम लिया तूने ,
कभी ना वो हारा है,
बाबुल जैसा मुझको तुमसे प्यार मिला,
मुझको समझने वाला कोई हक़दार मिला,
‘श्याम’ कहे ‘गिन्नी’ को,
तूने ही तो सँवारा है
स्वर – गिन्नी कौर।
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