
मैं हूँ तेरी बेटी मैया,
हर पल गले लगाती हो,
तुमसे मिला ये जीवन मुझको,
ना उपकार जताती हो,
मैं हूं तेरी बेटी मईया,
तर्ज – मैं हूँ तेरा नौकर बाबा।
कोख में बेटी सुनके दुनिया,
वाले आंख दिखाते हैं,
रिश्ते नाते सारे मिलके,
तुझको बहुत सताते है,
अपने आंचल की छाया कर,
हर सितम से बचाती हो,
ममतामयी मां तू ही जाने,
कैसे तूने पाला है,
मुझको खिलाया खुद ना खाया,
अपने मुंह का निवाला है,
स्वाभिमान से सर को उठाके,
मुझको चलना सिखाती हो,
कौन है अपना कौन पराया,
तुम ही मां बतलाती हो,
दुनियादारी इस समाज की,
तुम्हीं मां सिखलाती हो,
प्रथम गुरु तुम इस जहांन की,
हर हुनर मां सिखाती हो,
नयन से ओझल होने पर मां,
नैनो से नीर बहाती हो,
हर दुख हर संकट में तुम ही,
हर पल साथ निभाती हो,
‘नयना’ की खुशियों के खातिर,
बेटी की खुशियों के खातिर,
धन ‘रतन’ भी लूटाती हो,
गायिका – नयना किंकर।
लेखक / प्रेषक – रतन किंकर जी।
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