
मैंने मन को मंदिर बनाया,
ओ गौरी मैया के लाला,
तेरी मूरत को उसमे सजाया,
देखे – हम नैन बिछाए है।
हर कारज में जो भी प्राणी,
तुझको प्रथम ही ध्यावे,
किसी किस्म की हानि ना हो,
काम सिद्ध हो जावे,
गजमुख वाले ओ रखवाले,
कर हमपे तू करम,
नतमस्तक जो तेरे होवे,
तर जावे वो संसारी,
रिद्धि सिद्धि तू ही देता,
मूसे की करे सवारी,
तू गुणवन्ता तू भगवंता,
कर सबपे तू करम,
तू संचालक सबका मालिक,
विघ्न विनाश को टाले,
सबको तू ही संभाले,
ओ गणनायक ओ सुखदायक,
नमन करे तुझे हम,
स्वर – अनुराधा जी पौडवाल।
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