
मैया किसने रंगा है ये गुलाभी चोला,
ये लगता प्यारा ये सबसे नयरा ये नैया तारे दुःख हर का सारे,
देख के इसको भक्तो का दिल डोला,
किस किस्मत वाले ने मैया गोटा इसे लगाया है,
कौन है जिसने तारो की झील मिल से इसे सजाया है,
तारो सा चमके बिजली सा धमके ये माँ को प्यारा,
करे जग उजारा गंगाजल में रंग गुलाभी गोला,
ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा विष्णु जी ने शंकर से,
नदियों ने पर्वत से पूछा और धरती ने एम्बर से,
ये काज सवेरे ये कष्ट निवारे ये मंगल कारी ये संकट हारी,
सूरज ने चंदा से पूछा चनदा ये बोला
मेरे प्यारे भक्तो ने ही चोला मेरा बनाया है,
कभी न छूटे प्रेम आ ऐसा पका रंग चढ़ाया है,
करे आशा पूरी ये दिखता नूरी फूलो सा हस्ता हर दिल में वस्ता,
शेरावाली माता ने देखो ये भेद खोला,
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