
म्हापे जद भी मुसीबत,
कोई आवन लागे,
म्हारे सिर के ऊपर,
चुनड़ी लेहरावन लागे।।
जद नैया हिचकोले खावे,
माँ थारी चुनड़ लहरावे,
अपने आप ही भवर में,
नैया चालन लागे,
लाज भगत की जावन लागे,
चुनड़ी मैया की लहरावण लागे,
थारी चुनड़ी माँ लाज ने,
बचावण लागे,
माँ बचावण लागे,
जद जद म्हारो मन घबरावे,
हाथों हाथ ही यो बेटो,
मुस्कावन लागे,
जद जद मैया म्हासु रूठे,
‘बनवारी’ कुछ और ना सूझे,
थारा बेटा थाने चुनरी,
उड़ावन लागे,
स्वर – सौरभ मधुकर।
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