
म्हारा गुरुदेव थाने,
बार बार वंदना।
दोहा – गुरू की कीजे बंदगी,
कोटी कोटी प्रणाम,
प्रीत न जाने भृंग की,
गुरू करले आप समान।
यो तन विष की बेलड़ी,
गुरू अमृत की खान,
शीश दिया सतगुरू मिले,
तो भी सस्तो जान।
मैं जातो भव सिंध में,
मारा सतगुरू पकड़िया कैश,
डूबत भव जल तारियों,
माने दे सांचों उपदेश।
हजार बार वंदना,
मारा गुरुदेव थाने,
भगता रे आंगन दाता,
आप पधारो,
भगता रा अटकया कारज,
आप सवारो,
ज्ञान रा आधार आप री,
मारा गुरुदेव थारी,
निर्मल जल से,
पांव पखारु,
नैना सु निहारु,
भक्ति रा आधार आप री,
दास अशोक दाता,
थारो जस गावे,
चरणो री चाकरी में,
सब सुख पावे,
मुक्ति रा आधार आप री,
गायक – श्री रामकुमार जी मालुनि।
प्रेषक – वेद प्रकाश मीणा।
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