
म्हारा घर का थे पालनहार म्हाने थे धीर बंधाओ जी
म्हारा घर का थे पालनहार,
म्हाने थे धीर बंधाओ जी,
निंदिया ना आवे बाबा श्याम,
थे सिर पर हाथ फिराओ जी,
तर्ज – आ लौट के आजा।
काली घटाएं काले है बादल,
सर मेरे मंडराए,
बिजली भी चमके,
बादल भी कड़के,
अब ना देर करो म्हारा श्याम,
छायो अँधियारो जीवन में मेरे,
क्यों ना दरश दिखाओ जी,
थारी बाट उडीका म्हारा श्याम,
म्हणे क्यों तरसाओ जी,
अब तो आ जाओ घनश्याम,
क्यों थे म्हाने रुलाओ जी,
बचपन सु माँ ने म्हारे ओ बाबा,
थारो ही दरस करायो जी,
हारे को साथी म्हारो यो बाबा,
यो ही म्हणे बतलायो जी,
सबकी बिगड़ी बनाए बाबा श्याम,
मेरी बिगड़ी बनाओ जी,
‘आशीष’ की है या ही विनती,
म्हणे थे चाकर लगाओ जी,
चाकर लगाओ दुखड़ा मिटाओ,
म्हारे थे निडे बुलाओ जी,
मेरा दुखड़ा मिटाओ बाबा श्याम,
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