
म्हारा सतगुरु जाम्भाजी,
म्हारा धिन गुरु जाम्भाजी।।
ए रूप कोई राम को धार्यो जी,
ए रावण ने मारीयो जी,
रावण ने मारीयो जी,
विभिषण तार्यो जी,
मारा सतगुरु जाम्भाजी,
मारा धिन गुरु जाम्भाजी।।
रूप कोई नरसिंह धार्यो जी,
प्रहलाद ऊबारीयो रे,
हिरण्यकश्यप मारीयो जी,
ए लोवट घर आया जी,
सब कुल ने तार्यो जी,
लोवट घर आया जी,
ए भक्त बन आया जी,
कलयुग मे आया जी,
गुरु जम्भ कहलाया जी,
सब जीवो ने तार्यो जी,
कथ रामनिवास गावे,
ओ चरना मे नित आवे,
ओ लवेरा वाला जी,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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