
यशोदा तेरा ललना सताए हम को
कभी मटकी को फोड़े कभी बहियाँ मरोड़े
कभी ऊँगली पकड़ के नचाये हम को
जब जब हम यमुना तट जाए पीछे पीछे आये
आरे मखान मिश्री छीने हम से मटकी फोड़ गिराये,
कभी चुनरी पकड़ के गिराए हम को
जब हम दही वेचने जाए करता जोरा जोरी
ग्वाल बाल संग मिलके कान्हा करता माखन चोरी
कभी कंकड़ीया मार के रुलाये हम को
जब यमुना पे जाए नहाने वस्त्र उठा ले जाए
कदम की डाल पे बेठ के नटखट मुरली मधुर भ्जाये
कभी हस हस के मस्का लगाये हम को
हम से कहे गुजरिया जाके जो मैया को बोली
राह रोक लेंगे केवल हम ग्वालो की टोली
कभी अखियाँ मिला के धमकावे हम को
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