
यह प्रेम सदा भरपूर रहे हनुमान तुम्हारे चरणो में
By me. This thread of my life is to you
यह प्रेम सदा भरपूर रहे,
हनुमान तुम्हारे चरणो में,
यह अर्ज मेरी मंजूर रहे,
तर्ज – मिलता है सच्चा सुख केवल।
निज जीवन की यह डोर तुम्हे,
सौंपी है दया कर इसको धरो,
उद्धार करो ये दास पड़ा,
संसार में देखा सार नहीं,
तब ही चरणों की शरण गहि,
भवबंध कटे यह विनती है,
आँखों में तुम्हारा रूप रमे,
मन ध्यान तुम्हारे में मगन रहे,
धन अर्पित निज सब कर्म करे,
वह शब्द मेरे मुख से निकले,
मेरे नाथ जिन्हे सुनकर पिघले,
‘देवेंद्र’ ‘राघवेंद्र’ के भाव ऐसे रहे,
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