
यह भक्ति की रसधार है
जो बह जाए इसमें
उसका तो बेड़ा पार है
संजोया है भावों मनका
भक्ति भाव बड़े चाव से
राम नाम की बना ली माला
मैनें तो मनोभाव से
जपते जपते निश्चित होना
एक दिन मेरा उद्धार है
फेरन लगा हूँ जब से माला
मुझे दुखों की ना परवाह रही
राम नाम का सुमिरन करते
मुझे सुखों की ना चाह रही
उसके चरणों में जीवन बीते
प्रभु जो जीवन का आधार है
काल के जब पाश फ़सूं मै
ना मुझको कोई तब डर हो
बैकुंठ धाम में मिले ठिकाना
प्रभु चरणों में मेरा घर हो
कहे राजीव कुछ और नहीं
मुझे इसके सिवा स्वीकार है
© राजीव त्यागी
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