
यहाँ प्यार की बाते होती है नफरत को मिटाया जाता है
यहाँ प्यार की बाते होती है,
दोहा – श्री कृष्ण को चाहता हूँ मैं,
और आशिक़े सुभान हूँ मैं,
वेद पढ़ लेता हूँ मैं,
और वाक़िफ़े जहाँ हूँ मैं।
मेरा कर्म है सबको,
समझना अपना,
और बना क्या क्या नहीं,
बस इंसान हूँ मैं।
नफरत को मिटाया जाता है,
मिलजुल के यहां सब रहते हैं,
दिल दिल से मिलाया जाता है।।
तकदीर के मारे बंदों की,
तकदीर बनाई जाती है,
दर दर पर भटकने वालों को,
मेरे श्याम से मिलाया जाता है,
हर मोड़ पे हमको मिलते हैं,
दिल तोड़ने वाले दुनिया में,
इस दर पे सभी के जख्मों पे,
मरहम को लगाया जाता है,
यह बंदे हैं इमा वाले,
ईमान की बातें करते हैं,
मानवता भाईचारे का,
यहां पाठ पढ़ाया जाता है,
बाबा का करम है हम सब पर,
हम त्योहार मनाते हैं हर दिन,
जन्नत से भी जो प्यारा है,
दरबार सजाया जाता है,
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