
रंगो की बरसे फूहरिया चलो खाटू नगरिया
रंगो की बरसे फूहरिया,
चलो खाटू नगरिया,
खाटू नगरिया चलो खाटू नगरिया,
तर्ज – सावन की बरसे बदरिया।
रंग बिरंगी ध्वजा उठाके,
सांवरिया का ध्यान लगाके,
मिलने की इनकी डगरिया,
जिसने भी दिल से श्याम जपा है,
श्याम भी उसके साथ चला है,
रखता है हर पल खबरिया,
श्याम मिलन की बेला आई,
इनमे सारे लोग लुगाई,
नाचे जा इनकी दुअरिया,
जो जिस मन से द्वारे जाता,
वो मन चाहा ही वर पाता,
‘यश’ का श्याम सांवरिया,
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