
रघुवर चरणों में, दे दे ठिकाना मुझे,
मैं भटकता हूँ, राह दिखाना मुझे,
मैं तो पूजा से, जप तप से अंजान हूँ,
मतलबी लोगो से, मैं परेशान हूँ -2
कितना भरमाया है, ये जमाना मुझे,
तन कही और है, मन कही और है
सुख की चाहत की, भारी यहाँ दौड़ है -2
इस समंदर में, अब ना बहाना मुझे,
ये है काजल का घर, बच के कैसे रहूं,
अपनी आवाज़ दिल की, मैं किससे कहूं -2
इस मुसीबत से, तू ही बचाना मुझे
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